प्रदेश की त्रिस्तरीय पंचायतों में छह महीने से अधिक समय से 3800 से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। इनमें 33 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं जो असंगठित हो चुकी हैं। इन पंचायतों को केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता नहीं मिल पा रही है और न ही यहां नियमित बैठकें हो रही हैं।
पंचायत निदेशालय ने खाली पदों पर उपचुनाव कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। पिछले वर्ष हरिद्वार को छोड़कर राज्य के 12 जिलों में पंचायत चुनाव हुए थे। इसके बाद नवंबर 2025 में उपचुनाव भी कराए गए, लेकिन कई पद अब भी रिक्त हैं। निदेशालय के अनुसार ग्राम पंचायत सदस्यों के 55,587 पदों में से 3,843 पदों पर नामांकन नहीं हुआ।
इसके अलावा देहरादून और उत्तरकाशी में क्षेत्र पंचायत सदस्य के एक-एक पद खाली हैं। अल्मोड़ा के भिकियासैंण में क्षेत्र प्रमुख और ऊधमसिंह नगर के सितारगंज में कनिष्ठ उप प्रमुख का पद भी रिक्त चल रहा है।
पंचायतों के असंगठित रहने से 15वें वित्त आयोग की धनराशि में कटौती का प्रावधान है। इससे संबंधित पंचायतों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है और विकास कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
प्रदेश की असंगठित ग्राम पंचायतों में पौड़ी गढ़वाल, अल्मोड़ा, पिथौरागढ़, टिहरी गढ़वाल, चमोली, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और ऊधमसिंह नगर जिलों की कई ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
संयुक्त निदेशक पंचायत हिमानी ने कहा कि जब तक पंचायतें असंगठित रहेंगी, तब तक वहां न बैठकें हो पाएंगी और न ही केंद्र सरकार से वित्तीय सहायता मिल सकेगी, जिससे विकास कार्यों पर असर पड़ेगा।