Sun. Sep 13th, 2026

उत्तराखंड में नकली दवाओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत औषधि नियंत्रण विभाग ने बुधवार को देहरादून के ईस्ट होप टाउन क्षेत्र के ग्राम देवीपुर-परवल में संचालित एक कथित नकली दवा फैक्टरी का भंडाफोड़ किया। छापेमारी के दौरान इंटास, मैकलियोड्स और डॉ. रेड्डीज जैसी प्रतिष्ठित कंपनियों के नाम से तैयार की जा रही बड़ी मात्रा में नकली दवाएं, पैकिंग सामग्री और दवा निर्माण में इस्तेमाल होने वाली मशीनें बरामद की गईं। प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के तार उत्तर प्रदेश समेत अन्य राज्यों तक जुड़े होने के संकेत मिले हैं।

गुप्त सूचना के आधार पर संयुक्त कार्रवाई

औषधि नियंत्रण विभाग के अनुसार, आयुक्त और अपर आयुक्त के निर्देश पर प्रदेशभर में नकली दवाओं के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत मिली गोपनीय सूचना के आधार पर ग्राम देवीपुर स्थित एक मकान में छापेमारी की गई। मामले के उत्तर प्रदेश से जुड़े होने की आशंका के चलते उत्तर प्रदेश औषधि नियंत्रण विभाग की टीम भी कार्रवाई में शामिल रही।

नामी कंपनियों के नाम पर बनाई जा रही थीं दवाएं

कार्रवाई के दौरान इंटास, मैकलियोड्स और डॉ. रेड्डीज जैसी कंपनियों के नाम से तैयार की जा रही कथित नकली दवाएं बरामद हुईं। इनमें गैबापिन-100, जोरिल एम-2 और सेफोलैक-200 सहित कई दवाओं का बड़ा स्टॉक मिला। इसके अलावा रैपर, लेबल, डिब्बे और अन्य पैकेजिंग सामग्री भी जब्त की गई। दवा निर्माण और पैकिंग में उपयोग होने वाली मशीनें और उपकरण भी अधिकारियों ने अपने कब्जे में ले लिए।

किराये के मकान में चल रहा था संचालन

जिस मकान में कार्रवाई की गई, उसके मालिक विनय चमोली बताए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि मकान के तीन कमरे अमित शर्मा नामक व्यक्ति को किराये पर दिए गए थे। हालांकि मौके पर किरायानामा उपलब्ध नहीं कराया जा सका। विभाग अब मकान मालिक, किरायेदार और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच कर रहा है।

अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच

प्रारंभिक जांच में इस गिरोह के उत्तर प्रदेश से जुड़े होने के संकेत मिले हैं। इसी वजह से उत्तर प्रदेश औषधि नियंत्रण विभाग को भी जांच में शामिल किया गया। दोनों राज्यों की टीमें मिलकर यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि नकली दवाओं की आपूर्ति किन-किन राज्यों में की जा रही थी और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका है।

मुख्य आरोपी की पहचान

जांच में अरुण चौधरी उर्फ टुंडा का नाम मुख्य आरोपी के रूप में सामने आया है। वरिष्ठ औषधि निरीक्षक मनेंद्र सिंह राणा और औषधि निरीक्षक विनोद जगूड़ी आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की प्रक्रिया में जुटे हैं। बरामद सामग्री को कब्जे में लेकर विस्तृत जांच की जा रही है और पूछताछ के आधार पर अन्य संदिग्धों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

अभियान रहेगा जारी

राज्य औषधि नियंत्रक ताजबर सिंह जग्गी ने कहा कि प्रदेश में नकली दवाओं के निर्माण, भंडारण और बिक्री में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। यदि जांच में अन्य राज्यों से जुड़े गिरोहों की संलिप्तता सामने आती है, तो संबंधित राज्यों के औषधि नियंत्रण विभागों के साथ समन्वय कर उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।