8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की उम्र में हुआ निधन, तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों से हुए सम्मानित; किसानों की मदद के लिए भी बनाई अलग पहचान
मुंबई। हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर 2026 को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। अपनी दमदार आवाज, प्रभावशाली संवाद अदायगी और चुनौतीपूर्ण किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर ने लगभग पांच दशक के करियर में भारतीय सिनेमा पर अपनी अमिट छाप छोड़ी। परिंदा, क्रांतिवीर, अब तक छप्पन, वेलकम और नटसम्राट जैसी फिल्मों में उनके अभिनय के अलग-अलग रंग देखने को मिले। फिल्मों के अलावा किसानों और ग्रामीण समुदायों की सहायता के लिए किए गए उनके प्रयास भी उनके जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे।
स्रोत: “द इंडियन एक्सप्रेस” (https://indianexpress.com/article/entertainment/bollywood/nana-patekar-death-live-updates-actor-passes-away-75-goa-industry-mourns-2-10911696/)।
- विश्वनाथ पाटेकर था असली नाम
नाना पाटेकर का जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र में हुआ था। उनका आधिकारिक नाम विश्वनाथ दिनकर पाटेकर था। अभिनय की दुनिया में उन्होंने नाना पाटेकर के नाम से पहचान बनाई। रंगमंच से शुरुआत करने के बाद उन्होंने फिल्मों में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी विशिष्ट अभिनय शैली के कारण दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो गए।
- ‘परिंदा’ और ‘क्रांतिवीर’ से मिली खास पहचान
नाना पाटेकर के करियर में परिंदा और क्रांतिवीर महत्वपूर्ण फिल्में रहीं। परिंदा में उनके अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। वहीं, क्रांतिवीर में उनके प्रभावशाली अभिनय के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किया गया। इन फिल्मों ने उन्हें हिंदी सिनेमा के प्रमुख अभिनेताओं में स्थापित करने में अहम भूमिका निभाई।
- तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्मश्री से सम्मानित
नाना पाटेकर को कुल तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिले। परिंदा के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता, क्रांतिवीर के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता और अग्नि साक्षी के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार उनके नाम रहा। वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया। यह सम्मान कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए दिया गया था।
स्रोत: “अल जज़ीरा की रिपोर्ट” (https://www.aljazeera.com/news/2026/10/8/acclaimed-indian-actor-nana-patekar-dies-aged-75) और “भारत सरकार की पद्म पुरस्कार सूची” (https://www.pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?lang=2®=48&relid=91838)।
- अभिनेता के साथ निर्देशक भी थे नाना पाटेकर
नाना पाटेकर ने अभिनय के अलावा निर्देशन में भी अपनी प्रतिभा दिखाई। वर्ष 1991 में रिलीज हुई फिल्म प्रहार: द फाइनल अटैक का निर्देशन उन्होंने किया और इसमें मुख्य भूमिका भी निभाई। फिल्म में एक सैन्य अधिकारी के किरदार के लिए उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण भी लिया था। इस फिल्म ने उनके करियर का एक अलग पक्ष सामने रखा।
- गंभीर किरदारों से कॉमेडी तक का सफर
नाना पाटेकर की खासियत थी कि वे गंभीर और चुनौतीपूर्ण भूमिकाओं के साथ हास्य किरदारों में भी दर्शकों का मनोरंजन करते थे। अब तक छप्पन में पुलिस अधिकारी की भूमिका और वेलकम में उदय शेट्टी का किरदार इसके उदाहरण हैं। विशेष रूप से वेलकम में उनकी संवाद अदायगी और हास्य शैली को दर्शकों ने खूब पसंद किया।
मराठी सिनेमा में नटसम्राट उनकी उल्लेखनीय फिल्मों में शामिल रही। इसमें उन्होंने एक वरिष्ठ रंगमंच कलाकार की भूमिका निभाई, जो पारिवारिक रिश्तों और जीवन की बदलती परिस्थितियों से जूझता है।
- किसानों की मदद के लिए शुरू किया नाम फाउंडेशन
नाना पाटेकर की पहचान केवल फिल्मों तक सीमित नहीं रही। उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ सितंबर 2015 में नाम फाउंडेशन की शुरुआत की। संस्था का उद्देश्य महाराष्ट्र में सूखे, जल संकट और कृषि संबंधी परेशानियों से जूझ रहे किसानों तथा ग्रामीण समुदायों की सहायता करना रहा है।
नाम फाउंडेशन ने जल संरक्षण, गांवों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों की सहायता जैसे कार्यों पर ध्यान दिया। संस्था की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इसकी पहल महाराष्ट्र में किसानों की समस्याओं और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट के समाधान की दिशा में की गई थी।
स्रोत: “नाम फाउंडेशन की आधिकारिक वेबसाइट” (https://naammh.org/about-us/)।
- निजी जीवन को रखा सादगीपूर्ण
नाना पाटेकर अपनी निजी जिंदगी को सार्वजनिक चर्चा से काफी हद तक दूर रखते थे। पर्दे पर उनका व्यक्तित्व जितना प्रभावशाली था, सार्वजनिक जीवन में वे अपनी बेबाक बातचीत और स्पष्ट विचारों के लिए भी जाने जाते थे। उनका अभिनय पारंपरिक फिल्मी छवि से अलग रहा और उन्होंने ऐसे किरदार निभाए, जिनमें मानवीय भावनाओं, संघर्ष और सामाजिक परिस्थितियों को प्रमुखता मिली।
- पांच दशक की विरासत छोड़ गए नाना पाटेकर
नाना पाटेकर के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी शोक व्यक्त किया। प्रधानमंत्री ने हिंदी और मराठी सिनेमा में उनके योगदान तथा विभिन्न भूमिकाओं में उनकी विशिष्ट अभिनय शैली को याद किया।
नाना पाटेकर का सफर रंगमंच से शुरू होकर हिंदी और मराठी सिनेमा तक पहुंचा। उन्होंने अभिनय, निर्देशन और सामाजिक कार्यों के माध्यम से अलग पहचान बनाई। उनकी फिल्में और यादगार किरदार आने वाली पीढ़ियों के दर्शकों के लिए भी उनकी प्रतिभा की मिसाल बने रहेंगे।
स्रोत: “प्रधानमंत्री के शोक संदेश की सरकारी विज्ञप्ति” (https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2320717&lang=mr®=1)।

