देहरादून। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तराखंड से राज्यसभा की खाली होने वाली सीट के लिए दिनेश आर्य को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। उनके नाम की घोषणा के बाद प्रदेश की राजनीति में चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी ने उनके लंबे संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया है।
दिनेश आर्य लंबे समय से भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। उन्होंने विद्यार्थी परिषद से अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालते हुए वे भाजपा के जिला स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक की गतिविधियों में सक्रिय रहे।
आर्य नैनीताल जिले में भाजपा के जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। वर्ष 2017 से 2020 के बीच उन्होंने भाजपा अनुसूचित मोर्चा के राष्ट्रीय मंत्री के रूप में भी काम किया। वर्ष 2021 में वे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के जनसंपर्क अधिकारी रहे। इसके बाद उन्हें राज्य स्तरीय पेयजल अनुश्रवण परिषद का उपाध्यक्ष बनाया गया।
राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने से पहले दिनेश आर्य नैनीताल विधानसभा क्षेत्र में भी सक्रिय थे। बताया जाता है कि वे विधानसभा चुनाव में पार्टी से टिकट की उम्मीद कर रहे थे और क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क कर रहे थे। हालांकि पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाकर एक बड़ी राजनीतिक जिम्मेदारी दी है।
भाजपा के इस फैसले को सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दिनेश आर्य दलित समाज से आते हैं और कुमाऊं क्षेत्र में उनकी राजनीतिक सक्रियता रही है। ऐसे में उनके चयन को पार्टी की सामाजिक प्रतिनिधित्व की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
उत्तराखंड से मौजूदा राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। इसी सीट पर चुनाव होना है। विधानसभा में भाजपा के पास पर्याप्त संख्या में विधायक होने के कारण उसके उम्मीदवार की जीत की संभावना मजबूत है।
कांग्रेस की ओर से उम्मीदवार नहीं उतारे जाने की स्थिति में दिनेश आर्य का राज्यसभा पहुंचना लगभग तय माना जा रहा है। अंतिम प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनके निर्विरोध निर्वाचित होने की औपचारिक घोषणा की जाएगी।
राज्यसभा में उत्तराखंड का प्रतिनिधित्व करने वाले दिनेश आर्य भाजपा संगठन में अपने लंबे अनुभव के साथ अब राष्ट्रीय स्तर पर नई भूमिका निभाते नजर आएंगे।


