पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्र में स्थित बुगडीयार गांव के लिए इस बार की दिवाली ऐतिहासिक होने जा रही है। आजादी के दशकों बाद पहली बार गांव में बिजली पहुंची है। अब तक लालटेन और सोलर लाइट के सहारे जीवन बिताने वाले ग्रामीण इस बार बिजली की रोशनी में दिवाली मनाएंगे।
भारत-चीन सीमा के नजदीक स्थित मुनस्यारी तहसील के बुगडीयार गांव तक बिजली पहुंचाना आसान नहीं था। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और कठिन रास्तों के बावजूद उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने महज छह महीने में विद्युत लाइन बिछाने का काम पूरा किया। इस वर्ष मार्च में शुरू हुआ कार्य अब पूरा हो चुका है।
बुगडीयार और रड़गाड़ी मुनस्यारी क्षेत्र के माइग्रेशन गांव हैं। गर्मियों के मौसम में जनजातीय समुदाय के लोग अपने मवेशियों के साथ इन गांवों में पहुंचते हैं और कई महीने यहां रहते हैं। बिजली की सुविधा नहीं होने के कारण ग्रामीणों को लंबे समय से लालटेन, मोमबत्ती और सोलर लाइट पर निर्भर रहना पड़ता था।
स्थानीय लोगों के अनुसार, गांव में बिजली पहुंचना उनके लिए किसी बड़ी सौगात से कम नहीं है। इससे न केवल जीवनशैली में बदलाव आएगा, बल्कि सीमांत क्षेत्र में विकास की नई संभावनाएं भी खुलेंगी।
21 करोड़ रुपये की लागत से बिछेगी 62 किलोमीटर विद्युत लाइन
सीमांत क्षेत्र के अन्य माइग्रेशन गांवों को भी बिजली से जोड़ने की योजना बनाई गई है। इसके तहत मिलम, लस्पा, मतोली, बिल्जू, बुर्फू, मापा, टोला और गनघर जैसे गांवों तक बिजली पहुंचाई जाएगी। इसके लिए लीलम से करीब 62 किलोमीटर लंबी विद्युत लाइन बिछाई जानी है। इस परियोजना पर लगभग 21 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
सेना और आईटीबीपी को भी मिलेगी राहत
बुगडीयार में बिजली पहुंचने से स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ सीमांत क्षेत्र में तैनात सेना, आईटीबीपी और सीमा सड़क संगठन (BRO) को भी लाभ मिलेगा। नियमित बिजली आपूर्ति से क्षेत्र में सुरक्षा और विकास से जुड़ी गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।
दशकों से बिजली का इंतजार कर रहे बुगडीयार के ग्रामीणों के लिए यह दिवाली यादगार बनने जा रही है। इस बार गांव के घर बिजली की रोशनी से जगमग होंगे और सीमांत क्षेत्र में विकास की नई उम्मीद दिखाई देगी।

